शनि देव चालीसा ,Shani Chalisa In Hindi

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शनि देव एक ग्रह को संदर्भित करता है, और नव ग्रहों में से एक है जिसे हिंदू ज्योतिष में नवग्रह कहा जाता है। शनि भी पुराणों में एक पुरुष देवता हैं, जिनकी प्रतिमा में तलवार (या किसी अन्य हथियार) को लेकर एक भव्य अंधेरे (काला) आकृति है और एक भैंस (या कौवा या गिद्ध) पर बैठे हैं।

शनि देव का जनम, Birth Of Shani Dev

सूर्य देव ने संध्या से शादी की, जो एक बहुत वफादार और समर्पित पत्नी थी। उन्होंने सूर्य भगवान के लिए तीन बच्चों को वैवेशस्व मनु, यम और यमी के लिए जन्म दिया। संध्या एक पवित्र और प्रतिबद्ध पत्नी थी। हालांकि, उन्हें अपने पति के साथ रहने में मुश्किल हो गई, जो सभी समय गर्म रहते थे।

शनि देव जी को शनिवार के दिन बहुत उपयोगी है शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करने से आपको शनि देव जी की कृपा मिलती है और सारे दुःख दर्द दूर हो जाते है । श्री शनि देव जी चालीसा का पाठ बहुत ही सरल है। श्री शनि चालीसा उतना ही प्रभावशाली है जितना हनुमान चालीसा है । श्री शनि देव की पूजा अर्चना तथा इनका चालीसा करने से हमारे जीवन की कठिनाइयां दूर होती है। शनि ग्रह को जीवन काल का सबसे प्रभावशाली ग्रह माना जाता है ।

जब हमारे जीवन में शनि साढ़ेसाती या शनि महादशा का प्रभाव हो जाता है तो ग्यानी या पंडित लोग शनि चालीसा का पाठ करने की सलाह देते हैं। शनि देव जी का प्रसन्न होना ही हमारे जीवन की सफलता का रहस्य हो सकता है । शनिवार का दिन शनि देव का होता है । इस दिन शनि जी की पूजा प्रवल तरीके से की जाती है।

शनि देव चालीसा

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जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल कारन कृपाल.
दीनन के ढक दूर करि, कहीजै नाथ निहाल
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज
करहु कृपा हे रवि थाने, राखहु जान की लाज.

जयति जयति शनि दयाला,
करत साधा भक्तन प्रतिपाला. |1|

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै,
माथे रतन मुकुट छवि छाजै. |2|

परम विशाल मनोहर भाला,
टेडी दृष्टि भृकुटि विकराला. |3|

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके,
हिये माल मुक्तन मणि धमकी. |4|

कर में गधा त्रिशूल कुठारा,
पल बिच कराइ अरिहि संहारा. |5|

पिंघल, कृष्णो, छाया, नन्दन,
यौम, कोणस्थ, रौद्र, ढक भंजन. |6|

सॉरी, मंध शनि, दशा नाम,
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा. |7|

जापर प्रभु प्रसन हवाएं झाहिं,
राखहुँ राव कराइ शान माहीं. |8|

पर्वतहू तरुण होइ निहारत,
तृणहू को पर्वत करि दारथ. |9|

राज मिलत बन रामहिं दीन्ह्यो,
कैकेइहुँ की मेथी हरी लिनहियो. |10|

बहु मए मृग कपट धिकायी,
माथु जानकी गयी चुराई. |11|
लषणहिं शक्ति विकल करि डरा,
मचिगा ढल मए हाहाकार. |12|
रावण की घठि-मेथी बौराई,
रामचंद्र सोएं बैर बड़ाई. |13|

धियो कीट करि कंचन लंका,
बजी बजरंग बियर की डंका. |14|

नृप विक्रम पर तुहिन पगु धरा ,
चित्र मयूर निगलि गई हारा . |15|

हार नौलक्खा लाग्यो चोरी,
हाथ पेअर डरवायो थोड़ी . |16|

भारी दशा निकृष्ट धिकायो
ठेलहिं घर खोल्हु चलवायो. |17|

विनय राग दीपक माह खिनहायो ,
तब प्रसन्न प्रभु हवाई सुख दीन्हयो . |18|

हरिशचन्द्रहुं नृप नारी भीकनी,
आपहुं भरें डोम गर पानी. |19|

थाई नल पर दशा सिरानी'
भुंजी-मीन कूद गयी पानी . |20|

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई ,
पार्वती को साथी कराई . |21|

तनिक विलोकत ही करि रीसा ,
नभ उडी गेो गौरिसुत सीसा . |22|

पांडव पर भय दशा तुम्हारी ,
बची द्रौपदी होती उधारी . |23|

कौरव के बी गति मेथी मारयो ,
युद्ध महाभारत करि डारयो . |24|

रवि कह मुख महँ धरी तथकला ,
लेकर कोढ़ी परयो पाताला . |25|

सेष देव-लखि विनती लायी ,
रवि को मुख थे धियो छुड़ाई. |26|
वाहन प्रभु के साथ सुजाना ,
जज दिगज गदर्भ मृघ स्वाना . |27|

जम्बुक सिंह आधी नख धरी ,
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी. |28|

गज वहां लक्ष्मी गृह आवै ,
है थे सुख सम्पत्ति उपजावै. |29|

गदर्भ हानि कराइ बहु काजा,
सिन्हा सिद्धकर राज समाज. |30|

झाम्बुक बूढी नष्ट कर डारै ,
मृग दे कष्ट प्राण सम्हारै . |31|

जब आवहि प्रभु स्वान सवारी,
चोरु आधी होय दर भारी. |32|

तैसहि चारि चरण यह नाम ,
स्वर्ण लौह चांदी अरु थमा . |33|

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं ,
दान जान सम्पत्ति नाश्ता करवाएं . |34|

समता थांरा रजत शुभकारी ,
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी .|35|

जो यह शनि चरित्र नित गावै ,
कबहुँ न दशा निकृष्ट सतावै . |36|

अद्भुत नाथ धिकावैं लीला ,
करैं शत्रु के नाशी भली ढीला. |37|

जो पंडित सुयोग्य बुलवाई
विधवत शनि गृह शांति कराई . |38|

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत ,
डीप धान ढाई बहु सुख पावत . |39|
कहत राम सुन्दर प्रभु धसा ,
शनि सुमिरत सुख होठ प्रकाश . |40|

दोहा

पथ शनिश्चर देव को , की हो भक्त तैयार, |1|
करात पथ चालीस दिन , हो भवसागार पार. |2|



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